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लॉकडाउन की वजह से नमाज़े ईद के लिए क्या करें? पैग़ामे इदारा ए शरिया इस्लामी कोर्ट, रायपुर, छत्तीसगढ़

लॉकडाउन की वजह से नमाज़े ईद के लिए क्या करें?  पैग़ामे इदारा ए शरिया इस्लामी कोर्ट, रायपुर, छत्तीसगढ़
1.  कोरोना वाइरस की वजह से मौजूदा लॉकडाउन में हुकूमत की तरफ से पाँच नमाज़ीयों से ज़्यादा की इज़ाजत नहीं मिल रही तो जिन को इज़ाजत मिले वह लोग ईद की नमाज़ पढ़ लें और बाक़ी लोग अपनी इज़्ज़ते नफ्स को खतरे में न डालें । वह मअज़ूर है, "उमदतुल क़ारी शरहे बुखारी"

2. बहारें शरीअ़त में हैं इमाम ने नमाज़ पढ़ली और कोई शख्स बाक़ी रह गया ख्वाह वह शामिल ही न हुआ था या शामिल तो हुआ मगर उसकी नमाज़ फासिद हो गई तो अगर दूसरी जगह मिल जाए पढ़ ले वरना नहीं पढ़ सकता।हां बेहतर ये है कि ये शख्स चार रकअ्त चाशत की नमाज़ पढ़े।कोई इमाम हो तो मुख़्तसर जमात कर लें।वरना तन्हा ही पढ़ लें। शरीयत में ये महबूब है। "बहारे शरिअत, हिस्सा 4 सफह, 109 )"

3. सलाम फेरने के बाद 34 मर्तबा "अल्लाहो अकबर अल्लाहो अकबर" ज़रूर पढ़ें। 
यह नमाज़ खालिस नफ्ल नमाज़ होगी इसे नमाज़े ईद की कज़ा न समझें । ह़ाशिया तह़तावी में हैं।
 
4. नमाज़े ईद मिस्ल नमाज़े जुमा हैं कि ईद की नमाज़ उन्हीं पर वाजिब है जिन पर जुमा वाजिब है और इस की अदा के वही शरतें हैं जो जुमा की हैं सिर्फ़ इतना फ़र्क़ है कि जुमा में खुतबा शर्त हैं और ईद में सुन्नत ।
फतावा रज़वियह, में हैं नमाज़े ईद शहरों में हर मर्द आज़ाद, तंदुरुस्त, आक़िल, बालिग़, कादिर, पर वाजिब है क़ादिर के यह मअना है के न अन्धा हो न लूला हो न लुंझा हो न क़ैदी, न उसे नमाज़ को जाने में हाकिम या चोर या दुश्मन की तरफ से जान या माल या इज्ज़त का सच्चा खौफ हो । दुर्रेमुख्तार में हैं

नीज़ इसी फतावा रज़वियह में एक दूसरे मक़ाम पर रद्दुलमुहतार से हैं ।


मसाइले सदक़ा-ए-फितर

1. ईद के दिन सुबह सादिक़ तुलूअ होते ही (सहरी का वक़्त ख़त्म होते ही सुबह सादिक़ शुरू हो जाती है) मालिके निसाब पर सदक़ा-ए-फितर वाजिब होता है वह अपनी और अपने ना बालिग़ औलाद की तरफ से सदक़ा-ए-फितर निकाले ।

2. औरत या बालिग़ औलाद का फितरा उनके बगैर इज़्न (बग़ैर इजाज़त) अदा कर दिया तो अदा हो गया बशर्त ये के उसकी अयाल में हों यानी उसका नफ़क़ा वगैरह इस के जिम्मा हो वरना बालिग़ औलाद की तरफ से बिला इज़्न अदा न होगा,

3. बहारें शरीअ़त हिस्सा -5 सदक़ा -ए- फितर का बयान )

4. सदक़ा-ए-फितर में वो शहर मुराद है जहां खुद है अगर खुद एक शहर में हैं और उसके छोटे बच्चें और गुलाम दूसरे शहर में तो जहां खुद है वहां के फुक़रा,मिस्कीन,या दीनी इदारों पर सदक़ा-ए-फितर तक़सीम करे ।
बहारे शरिअत हिस्सा 5, सफ़ह 65)

और उसी शहर की क़ीमत का ऐतबार है,

29 रमज़ानुल मुबारक को चाँद देखने का एहतिमाम करें, चाँद नज़र आ जाने की सूरत में मक़ामी क़ाज़ी(क़ाज़ी ए छत्तीसगढ़) या किसी मोतबर आलिम से राब्ता करके शहादत अदा करें और अगर चाँद नज़र न आये तो ख़बरे मुस्तफीज़ के ज़रिए यानी अपने मुल्क के किसी मोतबर आलिम,मुफ़्ती या मुहक़्क़ीक़ जिसे आप बख़ूबी जानते पहचानते हों उससे (टेलीफोन,मोबाइल या टीवी न्यूज चैनल वगैरह) के ज़रिए राब्ता क़ाएम करके लिखित या ज़बानी शहादत हासिल कर सकते हैं।वरना तीस (30) की गिनती पूरी करें ।

राब्ता क़ाएम करें:-
0771-2273851, 9098765037, 9993797306, 9301977660

ये मैसेज लोगों तक ज़रूर पहुचाएं।

मिन जानिब  - आले नबी औलादे मख़्दूम अशरफ हुज़ूर अमीरे शरीयत अल्लामा मौलाना सैय्यद रईस अशरफ अशरफी जीलानी (क़ाज़ी ए छत्तीसगढ़)

27रमज़ानुल मुबारक 1441 हिज़री,