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कवर्धा : शक्कर कारखाने में हुई 7 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी, अध्यक्ष समेत 4 को हटाने का आदेश जारी

कवर्धा : शक्कर कारखाने में हुई 7 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी, अध्यक्ष समेत 4 को हटाने का आदेश जारी

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में आर्थिक गड़बड़ी उजागर हुई है। इस मामले में संचालक मंडल के अध्यक्ष भेलीराम चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष गणेश प्रसाद तिवारी, सदस्य शिव प्रसाद वर्मा और साकेत चंद्रवंशी को पद से हटाने आदेश जारी हुआ है। आरोप है कि पेराई सत्र 2017- 18 के दौरान इन्होंने अवैध तरीके से 2 हजार से अधिक पर्चियां निकलवाई। अपने सगे सम्बंधियों को फायदा पहुंचाने  किसानों से कम दर में गन्ना खरीदकर कारखाने को बेचा। गन्ना पर्चियों में गड़बड़ी कर कारखाने को 7.03 करोड़ रु. नुकसान पहुंचाया।

भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष दानेश्वर सिंह परिहार ने मामले की शिकायत की थी। अपर कलेक्टर ने इसकी जांच की । इसके बाद दुर्ग में सहकारी संस्थाओं के उप-पंजीयक ने रिपोर्ट की जांच कर अपनी कार्रवाई की अनुशंसा की थी। जांच में दोष साबित होने पर सहकारी संस्थाओं के पंजीयक धनंजय देवांगन ने 21 जनवरी तक चारों को पद से हटाने आदेश जारी किया है। साथ ही अगले 3 साल तक समितियों के किसी भी पद के लिए अयोग्य करार दिया है। 

ऐसे दिया था गड़बड़ियों को अंजाम 

जांच रिपोर्ट के मुताबिक अध्यक्ष भेलीराम चंद्रवंशी ने नागपुर की कंपनी वर्चुअल गैलेक्सी इंफोटेक लिमिटेड से पर्ची जारी करने से जुड़ा सुपर एडमिन यूजर पासवर्ड लिया था। तकनीकी रूप से यह पासवर्ड कारखाने के सहायक प्रोग्रामर और उप मुख्य गन्ना विकास अधिकारी के पास रहता है। लेकिन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व शेष दो सदस्यों ने कंप्यूटर ऑपरेटर पर दबाव डालकर पर्ची की तारीख अपडेट कराई। नतीजा यह हुआ कि पेराई क्षमता से ज्यादा गन्ना कारखाने में आ गया। उसकी पेराई 6- 7 दिनों बाद हुई। इससे किसानों को गन्ना बेचने के लिए परेशान होना पड़ा। 

जांच में यह बात सामने आई  कि वर्ष 2017- 18 में मार्च-अप्रैल के दौरान गन्ने में शक्कर की रिकवरी 7.33प्रतिशत रही। उसी अवधि में वर्ष 2018- 19में औसत रिकवरी 10 प्रतिशत आई। यानी गन्ना सूखने के कारण से 2.67 प्रतिशत की कमी आई। ऐसे में कारखाने को 22,689.66 क्विंटल शक्कर का नुकसान हुआ। 3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से इसकी कीमत  7.03 करोड़ रुपए होती है। यह पाया गया कि सदस्यों और पदाधिकारियों ने कंप्यूटर ऑपरेटर पर दबाव गलत जानकारी अपडेट करवाई इससे किसानों का भी नुकसान हुआ और उत्पादन पर असर पड़ा।