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रेलवे ने अब तत्काल के बराबर किया प्रीमियम कोटा, सामान्य रिजर्वेशन की सीटें कर दी गईं कम

रेलवे ने अब तत्काल के बराबर किया प्रीमियम कोटा, सामान्य रिजर्वेशन की सीटें कर दी गईं कम

रेल यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और संरक्षा के दावों के बीच रेलवे प्रशासन कमाई का ऐसा दायरा बढ़ाया कि हर दिन सैकड़ों यात्रियों की सीधे तौर पर जेब कट रही है। सामान्य रिजर्वेशन श्रेणी का कोटा कम करके ट्रेनों में जितनी बर्थ तत्काल कोटे के लिए रिजर्व रहती है, उतनी ही सीटें प्रीमियम रिजर्वेशन श्रेणी में डाल दी गई है। इससे यात्रियों को दोगुना किराया देकर सफर करना पड़ रहा है। रेलवे के इस फिफ्टी-फिफ्टी के गेम से बड़ी संख्या में यात्री हलाकान है, उनका वेटिंग टिकट कन्फर्म नहीं हो पाता है। जबकि प्रीमियम कोटे से रेलवे की कमाई बढ़ गई है।

रेलवे का पीक यात्री सीजन हो या ऑफ सीजन, सारनाथ एक्सप्रेस, साउथ विहार, नवतनवा, अमरकंटक, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस और गोंडवाना एक्सप्रेस ऐसी ट्रेनें हैं, जिनमें हमेशा हर श्रेणी के रिजर्वेशन कोच में वेटिंग सूची बनी रहती है। स्लीपर कोच में इन ट्रेनों में तो त्योहारी सीजन के दौरान नो रूम जैसी स्थिति रहती है। इसके बावजूद सामान्य रिजर्वेशन कोटे की सीटें कम करके उसे प्रीमियम कोटे में डाल दिया गया है। ऐसे में तत्काल कोटे से टिकट नहीं मिल पाने की स्थिति में दोगुना चार्ज देकर यात्रियों को प्रीमियम कोटे से ही रिजर्वेशन टिकट लेना पड़ता है। जिसका असर सीधे जेब पर पड़ता है।

वहीं मुख्य टिकट आरक्षण केंद्र के मुताबिक प्रीमियम कोटे का दायरा बढ़ चुका है। इससे यह होता है कि जैसे-जैसे टिकट बनता जाता है, वैसे-वैसे टिकट का रेट भी बढ़ता जाता है। तत्काल कोटे में यदि रायपुर से सतना के बीच 360 रुपए सामान्य रिजर्वेशन में लगता है तो प्रीमियम कोटे में यात्रियों को 700 रुपए का भुगतान करना पड़ता है। तत्काल टिकट में 450 रुपए देना पड़ता है।